मेरी कलम से

मैं ही हूँ। पत्रकार। टीवी वाला। अधूरा कवि। क्वार्टर लेखक। दो बटा तीन ब्लागर। कस्बा पर लिख लिख कर घिस दिया हूँ। फेसबुक पर ही लघु प्रेम कथा लिखा। लप्रेक कहते हैं। डर से प्रेरित होकर ड्रेरित काव्य लिखता हूँ। तारीफों और गालियों के पार मेरा जहाँ कहीं और है। सत्यम शिवम् सुंदरम् । झूठों का सरताज डरता है, फँसाने को फंदा फेंकता है। अंग्रेज़ी सीख लो वर्ना कह दो कि आती नहीं है। जंग लगे सपनों को फिर से सपना बनाने आया हूँ इक़बाल मोहब्बत का रहे, घुड़सवार बन कर आया हूँ

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Sunday, 5 November 2017

कसीनो में रायसीना, नाचो रे डाकू हसीना


इस स्टोरी को आख़िर तक पढ़िए। फिर पढ़ने के बाद चुप हो जाइये। ध्यान रखिए कोई आपका फोन रिकार्ड तो नहीं कर रहा है। आपके आने-जाने पर निगाह तो नहीं रख रहा है। आपके भीतर भय का डोज़ डालने के लिए इतना काफी है। अगर आपके भीतर किसी प्रकार के भय का संचार होता है तभी यह स्टोरी समझ आएगी। पिछली स्टोरी के लिए किसी एडिशनल एडवोकेट जनरल को छुट्टी दी गई थी, इस बार कहीं वित्त मंत्री और कानून मंत्री ही छुट्टी पर न चले जाएँ।

स्टोरी से अलग आपको लप्रेक( लघु प्रेम कथा) का एक प्रसंग सुनाता हूँ। फोन टैप करने वाले ने उस रात सब कुछ सुन लिया था। लप्रेक का यह प्लॉट काल्पनिक था मगर सुनने वाला वास्तविक। अब आगे पढ़िए।
रायसीना के गलियारों में ख़ून के छींटे दिखे थे। हर ख़ून का रंग लाल नहीं होता है। सत्ता के पास अलग-अलग रंग के ख़ून होते हैं। रात का रिपोर्टर वहीं से निर्मल वर्मा को पढ़ते हुए गुज़र रहा था।उसने देख लिया था कि एक मुख्यमंत्री की धोती खोली जा रही थी। वो भाग रहा था मगर रायसीना के कसीनो के बाउंसर उसे वापस पकड़ लाए और नचाने लगे। गठबंधन तो प्यार का बंधन है, गाने के इस धुन को नोट करते वक्त रिपोर्टर की डायरी पर ख़ून के छींटें गिरे थे। कुछ विधायक टूट कर टूटे थे।
वो फोन पर उससे लगातार नोट्स ले रही थी।इतना ही पूछ पाई कि सही में भारत की रायसीना कसीनो में नाचने लगी है ? हाँ, शांति, कोरपोरेट के कसीनो में भारत की रायसीना नाच रही है।उसकी कमर में किसी कंपनी का कमरबंद दिख रहा था। तभी किसी ने फोन की सारी बातचीत रिकार्ड कर ली, आज तक नाम पता नहीं चला मगर उसके घर के बाहर चार चार टैंक दिखे थे। रायसीना अब एक कसीनो का नाम है। जहाँ काला धन सफेद कुर्ते में बिन बजाता है। नैतिकता बिन कपड़े के नाचती है।
तुम निर्मल वर्मा को पढ़ना बंद कर दो। शांति,तुम हर वक्त मुझे बुरे ख़्यालों से बचा लेना चाहती हो। क्या तुम हकीकत से बचा सकती हो ? मेरा यह प्लॉट रात का रिपोर्टर का ही विस्तार है। निर्मल वर्मा न होते तो मेरे पास ये प्लॉट नहीं होता।
तभी कॉरिडोर में चुप्पी की पदचाप सुनाई देती है मगर दिखाई नहीं देती है। कौन है वहाँ ? कोई आपका फोन सुन रहा है। फोन बंद कर दीजिए। व्हाट्स अप कॉल करें? टेलिग्राम पर बात करें ? सिग्नल ? सब डिलिट करो। डायरी लिखो शांति।
क्या वो अब भी आपका फोन सुनता है? हाँ, उसके डेस्कटॉप पर किसी ने हमारे ग्रुप का व्हाट्स अप चैट खोल दिया है। उसके पास हमारी बातचीत के सारे स्क्रीन शॉट हैं। ऐसा किसी ने हमारे बीच का किया होगा, मैं नहीं मानती। वो तो काफी आध्यात्मिक है। मैंने उसके ट्वीट देखे हैं। आप किसी पर शक कर लेते हैं। वो अच्छी लड़की है। मुझे तो उसके आई ब्रो बहुत पसंद हैं । प्लीज़ शांति, शक नहीं करता तो कसीनो में रायसीना को नहीं पहचानता!
यह लप्रेक अधूरा है। कभी पूरा करूँगा।आज पोस्ट कर दिया। स्टोरी के बारे में लिखता तो आप बिना पढ़े गाली देने लगते। वायर की यह स्टोरी साहसिक है मगर दूसरे पक्ष के जवाब का इंतज़ार कीजिए।

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